पारसमणि धाम बिहार के मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड अंतर्गत स्थित रहुआ-संग्राम गांव का एक प्राचीन एवं अत्यंत पवित्र शिवधाम है। यह स्थान वर्षों से श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रहा है तथा मिथिला क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है।
स्थानीय जनश्रुतियों, दंतकथाओं और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन स्थल का संबंध गुप्तकाल से माना जाता है। यह धाम विशेष रूप से संत शिरोमणि बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं जी की सिद्धि प्राप्ति स्थली के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं ने यहां कठोर तपस्या और साधना कर आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त की थी। इसी कारण यह भूमि भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र बनी हुई है।
भक्तों के बीच यह अटूट विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन, पूर्ण श्रद्धा और निर्मल भाव से बाबा पारसमणिनाथ के दर्शन हेतु यहां आता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। मंदिर का शांत वातावरण, दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभूति हर आने वाले भक्त को विशेष शांति प्रदान करती है।
भगवान शिव को समर्पित यह पावन धाम प्रत्येक रविवार को लगने वाले मेले के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। विशेष रूप से माघ माह के रविवार को आयोजित होने वाला मकर मेला संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में अत्यंत प्रसिद्ध माना जाता है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर पारसमणि धाम की भव्यता और भी अद्भुत हो जाती है। शिवरात्रि से प्रारंभ होकर लगातार चार से पांच दिनों तक यहां धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भजन-कीर्तन, महाआरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, धार्मिक प्रतियोगिताएं तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम स्थानीय श्रद्धालुओं और युवाओं के सहयोग से बड़े उत्साह के साथ संपन्न होते हैं। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
इतिहास के अनुसार, मंदिर का प्राचीन शिवलिंग कई वर्ष पूर्व चोरी हो गया था। इसके पश्चात स्थानीय श्रद्धालुओं एवं ग्रामवासियों के सहयोग से पुनः शिवलिंग की स्थापना की गई तथा वर्तमान मंदिर का निर्माण सामूहिक प्रयासों द्वारा कराया गया। आज भी इस धाम की व्यवस्था और देखरेख स्थानीय लोगों की श्रद्धा, सेवा और समर्पण से संचालित हो रही है।
हाल के वर्षों में पारसमणि धाम की बढ़ती प्रसिद्धि और धार्मिक महत्व को देखते हुए सरकार का ध्यान भी इस ओर आकर्षित हुआ है। स्थानीय लोगों के बीच यह आशा और विश्वास है कि आने वाले समय में इस धाम को बिहार एवं मिथिला पर्यटन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान प्राप्त होगा।
पारसमणि धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मिथिला की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है।
जय बाबा पारसमणिनाथ
हर हर महादेव
